चंदू चैंपियन फ़िल्म रिव्यू पढ़कर आपके अंदर का जोश भी उबाल मार कर निकलेगा Guaranteed है।

2024 में रिलीज़ हुई Chandu Champion एक ऐसी स्पोर्ट्स बायोपिक है जो सिर्फ कहानी नहीं सुनाती, बल्कि दर्शकों के दिल में जोश भर देती है। यह फिल्म भारत के पहले पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट Murlikant Petkar के संघर्षमय जीवन पर आधारित है।

इस चंदू चैंपियन फिल्म रिव्यू की शुरुआत एक बुजुर्ग चंदू से होती है, जो पुलिस स्टेशन में बैठा है और राष्ट्रपति पर केस करना चाहता है। यह सीन उत्सुकता जगाता है और कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है।

बचपन का सपना

छोटा चंदू ओलंपिक मेडल जीतने का सपना देखता है। वह महान पहलवान Khashaba Dadasaheb Jadhav से प्रेरित होता है। स्कूल में उसका मजाक उड़ाया जाता है, लेकिन उसका जवाब साफ होता है — “मैं मेडल लेकर आऊंगा।”

सेना और युद्ध: जिंदगी का कठिन मोड़

युवावस्था में चंदू सेना में भर्ती हो जाता है। 1965 की जंग में उसे 9 गोलियां लगती हैं। यह सीन भावुक कर देता है।

कोमा से जागने के बाद उसे पता चलता है कि उसका शरीर अब पहले जैसा नहीं रहा। यहीं से कहानी असली मोड़ लेती है।

इस चंदू चैंपियन फिल्म रिव्यू में कहना जरूरी है कि फिल्म का यह हिस्सा दर्शकों को अंदर तक हिला देता है।

हार नहीं मानी: पैरालंपिक तक का सफर

शारीरिक कमजोरी के बावजूद चंदू हार नहीं मानता। वह तैराकी को अपनाता है। कड़ी मेहनत और जिद के दम पर 1972 पैरालंपिक में 50 मीटर फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल जीतता है।

क्लाइमेक्स सीन में सिनेमाघर तालियों से गूंज उठता है। यही फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है।

फ़िल्म की कास्टिंग

अभिनय

इस चंदू चैंपियन फिल्म रिव्यू में सबसे ज्यादा तारीफ अगर किसी की होनी चाहिए, तो वह हैं Kartik Aaryanउन्होंने अपने करियर का सबसे अलग किरदार निभाया है। रोमांटिक हीरो से हटकर उन्होंने एक संघर्षशील खिलाड़ी की भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया है। उनकी बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन और इमोशनल सीन में गहराई दिखती है।

सह कलाकार

  1. Vijay Raaz कोच के रूप में शानदार हैं।
  2. Yashpal Sharma आर्मी ऑफिसर के रूप में प्रभावी हैं।
  3. Rajpal Yadav हल्का ह्यूमर जोड़ते हैं।
  4. Sonali Kulkarni पत्रकार की भूमिका में सटीक हैं।

लेकिन फिल्म की असली जान कार्तिक ही हैं।

निर्देशन

फिल्म का निर्देशन किया है Kabir Khan ने। उन्होंने कहानी को भावनात्मक और प्रेरणादायक दोनों रखा है। कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी लगती है, लेकिन क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते दर्शक पूरी तरह जुड़ जाते हैं।

संगीत और तकनीकी पक्ष

फिल्म का संगीत दिया है Pritam ने। गाने कहानी के साथ चलते हैं और जबरदस्ती नहीं लगते। सिनेमैटोग्राफी खासकर युद्ध और स्विमिंग के सीन में शानदार है। एडिटिंग थोड़ी टाइट होती तो फिल्म और बेहतर बन सकती थी।

फिल्म क्यों है खास?

इस चंदू चैंपियन फिल्म रिव्यू में यह साफ है कि फिल्म सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है। यह उन लाखों लोगों की कहानी है जो मुश्किल हालात में भी सपने देखना नहीं छोड़ते। पहले भी स्पोर्ट्स बायोपिक बनी हैं, लेकिन पैरालंपियन की कहानी कम ही देखने को मिलती है।

यही बात इसे खास बनाती है की इसमें हल्का ह्यूमर भी है, जो फिल्म को पूरी तरह गंभीर नहीं है। कुछ सीन मुस्कुराने पर मजबूर करते हैं। और जब क्लाइमेक्स आता है, तो मन करता है पूछें — “हाउज़ द जोश?” और जवाब आता है — “हाई सर!”

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क्या फिल्म में कमी है?

इस चंदू चैंपियन फिल्म रिव्यू में ईमानदारी से कहें तो:

  1. फिल्म थोड़ी लंबी है
  2. कुछ सीन खिंचे हुए लगते हैं
  3. शुरुआत थोड़ा धीमी है

लेकिन कहानी की ताकत इन कमियों को ढक देती है।

बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा

यह फिल्म खासकर बच्चों और युवाओं को जरूर दिखानी चाहिए।अगर आप जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते हैं और रास्ता मुश्किल लग रहा है, तो यह फिल्म आपको याद दिलाएगी —

चैंपियन वो नहीं जो कभी गिरता नहीं, बल्कि वो जो हर बार उठता है।

चंदू चैंपियन फिल्म फाइनल रिव्यू

कहानी ⭐⭐⭐⭐
अभिनय ⭐⭐⭐⭐½
निर्देशन ⭐⭐⭐⭐
संगीत ⭐⭐⭐⭐

कुल मिलाकर: 4/5 स्टार

यह चंदू चैंपियन फिल्म रिव्यू साफ बताता है कि यह फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है। अगर आप मोटिवेशनल और सच्ची कहानी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखें।

क्योंकि असली चैंपियन वही है —
जो हालात से हार नहीं मानता।

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