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गंगा दशहरा पर जाने माँ गंगा के अनसुने नाम और पूजा का विधि-विधान

On: September 29, 2025 7:09 PM
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हिन्दू विक्रम संवती पंचांग अनुसार हर वर्ष की ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 16 मई को मनाया जा रहा है। गंगा दशहरा पर माँ गंगा की पूजा करने से मिलते हैं अनन्य आशीर्वाद और वरदान।

 

माँ गंगा अवतरण और पौराणिक महत्व:

गंगा दशहरा 2024: सतयुग में माता गंगा का स्वर्ग से निकलकर भगवान शंकर की जटाओं से होते हुए धरती पर अवतरण हुआ था। पुराणों के अनुसार माँ गंगा सतयुग में भगवान विष्णु के श्री चरणों में विराजित थी। सूर्यवंश में राजा भगीरथ हुए जो महान और तपस्वी राजाओं में से एक थे। राजन के पूर्वजों की अस्थियां एक ऋषि के श्राप वश धरती पर जगह जगह बिखरी हुई थी। उन पूर्वजों की आत्माओं को मुक्त करने के लिए राजा ने माँ गंगा को धरती पर लाने के लिए हजारों वर्ष तपस्या की।माता गंगा वैकुंठ में श्री हरि के चरणों से निकलकर पहले भगवान शिव की जटाओं में पहुंची। धरती माँ का माता गंगा की धाराओं के वेग को लेने का सामर्थ्य नहीं था। इसी कारण भगवान शिव ने माता गंगा की 7 धाराएं – नलिनी, हृदनी, सिंधु, पावनी, सीता, चक्षु और भगीरथी को एक एक कर धरती पर प्रवाहित जाने के लिए कहा।

गंगा जल को घर में किस स्थान पर और कैसे रखे?

पवित्र गंगा जल को सदैव पीतल, चांदी, स्टील या मिट्टी के पात्र में रखना चाहिए। प्लास्टिक या अन्य किसी अन्य पदार्थ से बने पात्र में कभी रखकर नहीं रखना चाहिए। इससे गंगा जल में अशुद्धताएँ आती हैं।
इस जल को विशेष पूजाओं और अनुष्ठानों में उपयोग से देवता प्रसन्न होते हैं।

माँ गंगा की कैसे करें स्तुति और पूजा विधान:

माँ गंगा सनातन धर्म में केवल नदी मात्र नहीं है। माँ गंगा माँ होने के साथ देवी का भी स्थान रखती हैं। गंगा दशहरा पर पूजन् और दान से मनुध्य समस्त पापों से मुक्त होकर माँ गंगा की पूजा बगैर भगवान शिव की पूजा किये अधूरी मानी जाती है। मान्यताओं के मुताबिक देवी गंगा भगवान शिव की दूसरी अर्धांगिनी भी है। सवेरे स्नान करते समय “हर हर गंगे ” कह कर स्नान करें। माँ गंगा की पूजा में घी में चुपड़े हुए टिल को जल में या पीपल के वृक्ष के नीचे अर्पित करें। घी या तेल कक दीपक जलाकर भगवान शिव के मंत्र का जाप करना शुरू करे। शिव मंत्र के जप पश्चात् देवी माँ गंगा के मंत्र को जपना शुरू करें।
नैवेद्य में कोई भी फल या मिष्ठान का भोग लगाएं। दान के लिए किसी भी निर्धन व्यक्ति को भोजन या धन देकर पूजा सम्पन्न करें। इस विधा से पूजन करने पर भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

Astro Yogi Negi

एस्ट्रो योगी नेगी पिछले 5 वर्षों से आस्था, ज्योतिष और धर्म विषयों पर शोध-आधारित लेखन कर रहे हैं। उनके लेख पाठकों को तथ्यपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करते हैं।

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